Wednesday, October 31, 2018

क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार, इस दिन सोना व चांदी क्यों खरीदते है | धनतेरस 2018 शुभ महूर्त | धनतेरस पूजा विधि | धनतेरस का महत्व

इस वर्ष धनतेरस के त्योहार 5 नवंबर 2018 दिन सोमवार को मनाया जाएगा।




धनतेरस शब्द तो शब्दों से मिलकर बना है, धन और तेरस जहाँ पर धन का अर्थ लक्ष्मी (पैसो) से है और तेरस का अर्थ तेहरा अंको से है। दरअसल धनतेरस के त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुरूप कार्तिक महीने के तेहरवें दिन आता है। इसिलए इसे धनतेरस कहा जाता है। धनतेरस के बारें और भी अनेक कई मत है। कई विद्वानों के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन की देवीे का उत्सव होने के कारण इस दिन को धनतेरस कहते है। धनतेरस को धन त्रयोदशी व धन्वन्तरी त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही और कई मान्यतों के अनुसार इसी दिन समुन्द्र मंथन के समय माता लक्ष्मी का कलश के साथ आवरण हुआ। तब से इस दिन सुख समृद्धि के लिए नए बर्तन खरीदने का प्रचलन हुआ।




धनतेरस 2018 पूजा का शुभ महूर्त क्या है?

धनतेरस को धन त्रयोदशी व धन्वन्तरी त्रयोदशी भी कहा जाता है, इस दिन माँ लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। माता लक्ष्मी का पूजन शुभ मुहूर्त और प्रसाद काल के दौरान किया जाता है जो कि सूर्यास्त के बाद आता है। जोकि करीब 2 घण्टे तक रहता है। इस वर्ष 2018 में प्रसाद काल शाम 05:43 बजे से 08:04 बजे तक रहेगा। वहीँ वृषभ काल शाम 06:28 बजे से 08:37 बजे तक रहेगा।

धनतेरस की पूजा करने की विधि

जैसे कि सभी पूजा का शुभारंभ गणेश जी किया जाता है, वैसे ही धनतेरस की पूजा में सबसे पहले गणेश जी को पूजा जाएगा। आप गणेश जी को नए वस्त्र पहनाये व ताजे फूल अर्पित करें।
अब गणेश जी की पूजा के बाद भगवान धन्वंतरि का पूजन करें। भगवान धन्वंतरि को स्नान कराएं नए वस्त्र पहनाये। फिर उसके उनको 9 अलग अलग किस्म के अनाज अर्पित करे।
फिर भगवान कुबेर जी की पूजा करें। उनको फूल व मिठाई अर्पित करें। साथ ही माँ लक्ष्मी का पूजन करें।




धनतेरस का क्या महत्व है?

ये त्योहार माता लक्ष्मी का है, इस दिन पूजा करने से घर मे धन की कमी नही होती है। घर मे माँ लक्ष्मी का आगमन होता है। घर के बाहर दीपक जलाएं जाते है। नए नए आभूषण व बर्तन खरीदे जाते हैं।

धनतेरस के दिन क्यों खरीदा जाता है सोना व चांदी

धनतेरस के दिन लोग सोने व चांदी के आभूषण और स्टील के बर्तन आदि खरीदते हैं। माना जाता इनको खरीदने से आप धन की देवी माँ लक्ष्मी का घर पर ले आते है। इस दिन लोग सोने व चांदी के सिक्के भी खरीदते है तथा उनकी पूजा की जाती है।

क्यों मनाया जाता है धनतेरस के त्योहार और धनतेरस से जुड़ी कहानियाँ

राजा हिमा के पुत्र की कहानी
प्राचीन कथा के अनुसार, राजा हिमा के एक पुत्र था जिसकी मृत्यु के विषय में भविष्यवाणी हुई थी। पुत्र की शादी के 14वें मृत्यु हो जाएगी। वहीं जब उनके पुत्र की शादी हुई तो उनकी शादी के 14वें दिन उनकी पत्नी ने उन्हें सोने नही दिया। और साथ ही अपने कमरे के बाहर अपने सभी गहने, आभूषण, सोने व चांदी के सिक्के आदि रख दिया साथ ही अपना पूरा कमरा रोशनी से भर दिया। जिससे उन्होंने अपने पति को सोने ही नही दिया। रात के समय मे यमराज उनके पति के प्राण लेने आते है, लेकिन कमरे के बाहर सोना व चांदी साथ ही कमरे के अंदर बहुत ज्यादा रोशनी होने के कारण कमरे में प्रवेश न कर सके। रात भर यमराज उनके कमरे के बाहर प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन अंत मे हार कर सुबह को वहाँ से लौट गए।
तो इस तरह इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा, लोग अपने घर सोने व चांदी की चीज़ों को लाने लगे जिससे बुरी चीज़ों को घर से दूर रख सके।

समुंद्र मंथन की कहानी
कहा जाता है कि इसी दिन समुंद्र मंथन के समय सागर से अनेकों प्रकार की वस्तुएं के साथ माता लक्ष्मी निकली थी। इसीलिए आज के दिन धनतेरस मनाया जाता है। माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

भगवान शंकर और माता पार्वती से जुड़ी कहानी
कथाओ के अनुसार इस दिन माता पार्वती और शंकर जी ने पासा खेला था। जिसमें माता पार्वती जीती थी। लोगों के अनुसार इस दिन पासा खेलना शुभ माना जाता है, व लक्ष्मी जी का घर मे आगमन होता है।

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