Tuesday, September 18, 2018

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल वचन || मुंशी प्रेमचंद कोट्स इन हिन्दी - Famous Hindi

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धनपत राय प्रेमचंद "मुंशी प्रेमचंद" हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें नवाब राय नाम से भी जाना जाता है। मुंशी प्रेमचंद की साहित्य में बहुत ही रुचि थी इसलिए उन्होनें बहुत सी क़िताबे और कवितायेँ लिखी जो बहुत पसंद होने लगी। आज हम उन्ही के कहे कुछ अनमोल वचनों (कोट्स)को साझा कर रहे है।

मुंशी प्रेमचंद कोट्स – Munshi Premchand Quotes


“आत्मसम्मान की रक्षा हमारा सबसे पहला धर्म है।”

“निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है…।”

“यश त्याग से मिलता है, धोखाधड़ी से नहीं”

“चिंता रोग का मूल है…।”

“सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है,…।”

“डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है।”

“आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन गरूर है…।”

“लगन को कांटों क परवाह नहीं होती…।”

“जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है; उनका सुख लूटने में नहीं।”

“स्त्री गालियां सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मायके की निंदा उससे नहीं सही जाती।”

“बूढो के लिए अतीत में सूखो और वर्तमान के दु:खो और भविष्य के सर्वनाश से ज्यादा मनोरंजक और कोई प्रसंग नहीं होता।”

“विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला”

“सौभाग्य उसी को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचलित रहते हैं।”


“मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है।”

“दौलत से आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है…।”

“अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए, तो यह उससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।”

“क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है…।”

“साक्षरता अच्छी चीज है और उससे जीवन की कुछ, समस्याएं हल हो जाती है….।”

मुंशी प्रेमचन्द जी के जीवन में भी बहुत सी कठिनाएं आयी लेकिन फिर भी वह हमेशा मस्त एवं सरल जीवन जीने में मस्त रहे।

“संसार के सारे नाते स्‍नेह के नाते हैं, जहां स्‍नेह नहीं वहां कुछ नहीं है…।”

“खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।”

“जो प्रेम असहिष्णु हो, जो दूसरों के मनोभावों का तनिक भी विचार न करे, जो मिथ्या कलंक आरोपण करने में संकोच न करे, वह उन्माद है, प्रेम नहीं।”

“बल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद कोई नहीं सुनता।”


“जीवन को सफल बनाने के लिए शिक्षा की जरुरत है, डिग्री की नहीं। हमारी डिग्री है ~ हमारा सेवा भाव, हमारी नम्रता, हमारे जीवन की सरलता। अगर यह डिग्री नहीं मिली, अगर हमारी आत्मा जागृत नहीं हुई तो कागज की डिग्री व्यर्थ है।”

“हम जिनके लिए त्याग करते हैं, उनसे किसी बदले की आशा ना रखकर भी उनके मन पर शासन करना चाहते हैं। चाहे वह शासन उन्हीं के हित के लिए हो। त्याग की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, यह शासन भावना उतनी ही प्रबल होती है।”
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